संदेह और भ्रंतिमान अलंकार

संदेश और भ्रांतिमान अलंकार में अंतर क्या है 


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संदेह और भ्रांतिमान अलंकार

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संदेह अलंकार-


  1. इसमें संदेह वाचक शब्द होते हैं।
  2. इसमें अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है।
  3. इसमें हम स्वयं भ्रम दूर कर सकते हैं।
उदाहरण -:लक्ष्मी थी या दुर्गा थी या,
           स्वयं वीरता की अवतार


भ्रांतिमान अलंकार-


  1. इसमें भ्रम वाचक शब्द होते हैं ।
  2. इसमें झूठ निश्चय हो जाता है।
  3. इसमें भ्रम दूर करना संभव नहीं है।

उदाहरण -:समझ तुम्हें घनश्याम हरी 
‌      नाच उठे वन मोर।

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