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Prayojanvad ke gun AVN dosh ka varnan kijiye|up dled second semester

 प्रश्न: प्रयोजनवाद के गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए।|up dled second semester



प्रयोजनवाद (Pragmatism) एक आधुनिक शिक्षा-दर्शन है, जो उपयोगिता (usefulness) और अनुभव (experience) को महत्व देता है। इसके अनुसार वही ज्ञान सही है जो जीवन में काम आए।

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प्रयोजनवाद के गुण (Merits)

1. व्यावहारिक शिक्षा (Practical Education)

👉 प्रयोजनवाद शिक्षा को जीवन से जोड़ता है।

👉 बच्चे वही सीखते हैं जो उनके काम आए।

2. क्रियात्मक विधि (Learning by Doing)

👉 “करके सीखना” सबसे महत्वपूर्ण है।

👉 प्रयोग, गतिविधियाँ और प्रैक्टिकल काम पर जोर होता है।

3. प्रगतिशील एवं परिवर्तनशील दृष्टिकोण

👉 यह विचारधारा समय के अनुसार बदलती रहती है।

👉 नई-नई teaching methods को अपनाती है।

4. सामाजिक विकास पर बल

👉 बच्चों को समाज के लिए तैयार किया जाता है।

👉 सहयोग, सहभागिता और सामाजिक गुण विकसित होते हैं।

5. समस्या-समाधान क्षमता (Problem Solving)

👉 बच्चों को समस्याओं को हल करना सिखाया जाता है।

👉 सोचने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

 प्रयोजनवाद के दोष (Demerits)

1. आध्यात्मिकता की उपेक्षा

👉 यह केवल भौतिक (material) चीजों पर ध्यान देता है।

👉 नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को कम महत्व देता है।

2. उपयोगिता पर अधिक जोर

👉 जो उपयोगी है वही सही माना जाता है।

👉 इससे शिक्षा का उद्देश्य सीमित हो जाता है।

3. स्थायी सत्य का अभाव

👉 यह किसी स्थायी (permanent) सत्य को नहीं मानता।

👉 सत्य को समय और परिस्थिति के अनुसार बदलता मानता है।

4. ज्ञान का अस्थिर स्वरूप

👉 हर चीज बदलती रहती है, इसलिए ज्ञान स्थिर नहीं रहता।

👉 इससे स्पष्ट दिशा की कमी हो सकती है।

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