Class 12th Hindi final exam 2021 important कवि परिचय।

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Class 12th Hindi final exam 2021 important कवि परिचय।

 Class 12th Hindi final Exam 2021 important कवि परिचय

Class 12th Hindi final Exam 2021 important कवि परिचय।



  1. तुलसीदास [2020,17,14]

  2. सूरदास [2018,15,13]

  3. मैथिलीशरण गुप्त [2019,12]

  4. कबीर दास [ 2016,12]


जयशंकर प्रसाद 2020 , 19



काव्य गुण कितने प्रकार के होते हैं कक्षा 12 hindi 

सूरदास

दो रचनाएं- 

  1. सूर सागर

  2. सूर सुरावली

  3. साहित्य लहरी


भाव पक्ष -सूर के काव्य में भाव का सागर भरा पड़ा है ।उसकी भाव पक्ष की मुख्य विशेषताएं हैं - 1-सूर को वात्सल्य सम्राट कहा जाता है ।

2-वियोग श्रृंगार का मार्मिकता के साथ चित्रण किया है ।

3 -उनका बाल वर्णन मनोवैज्ञानिक है ।


कला पक्ष -सूर की रचनाओं में भाव पक्ष एवं कला पक्ष में मणिकांचन सहयोग है ।

सूर ने अपने भाव को ब्रजभाषा के माध्यम से व्यक्त किया है ।उनकी भाषा में कोमल कांत पदावली सरलता और प्रभाव है । उपमा , रुपक और उत्प्रेक्षा अलंकारों का प्रयोग उन्होंने प्रचुर मात्रा में किया है ।


साहित्य में स्थान -सूरदास गीती काव्य परंपरा के सशक्त गीतिकार है ' वो वात्सल्य और श्रंगार के अप्रितम गायक भी हैं ।हिंदी में भ्रमर गीत परंपरा के प्रवर्तक हैं ।

अपनी काव्य कला और साहित्यिक प्रतिभा के बल पर वे हिंदी साहित्य के शुभ माने जाते हैं ।



    तुलसीदास


दो रचनाएं-

  1. श्रीरामचरितमानस

  2. दोहावली

  3. कवितावली

  4. विनय पत्रिका।


मैथिली शरण गुप्त


दो रचनाएं- 

  1. साकेत

  2. पंचवटी

  3. जयद्रथ वध

  4. जय भारत

  5. चंद्रहास



    कबीर दास


दो रचनाएं-


कबीर की प्रमाणिक उपलब्ध कृति 'बीजक' है

इसके साखी ,सबद , रमैनी तीन भाग


 

Class 12th Hindi final exam 2021 important लेखक परिचय 

   


  1. आचार्य रामचंद्र शुक्ल [2020,17,15,12


  1. उषा प्रियवंदा  [2018,16]

  2. डॉ रघुवीर सिंह [2019,13,12]

  3. रामनारायण उपाध्याय [2018,14]

  4. शरद जोशी [ 2019,2020]



लेखक परिचय


आचार्य रामचंद्र शुक्ल(2019,10,12, 15,17)


दो रचनाएं-   चिंतामणि,त्रिवेणी


भाषा शैली - शुक्ल जी की भाषा परिष्कृत, प्रोढ़ एवं साहित्यिक खड़ी बोली है । शुक्ल जी की भाषा में व्यर्थ का आडंबर नहीं मिलता । शुक्ल जी की शैली में भारतीय पाश्चात्य शैलियों का समन्वय है फिर भी उन्होंने इससे हटते हुए अपनी शैली को भी अपनाया है । उनकी शैली समास के रूप से प्रारंभ होकर व्यास शैली के रूप में समाप्त होती है अर्थात एक विचार को सूत्र रूप में कहकर फिर उसकी व्याख्या कर देते हैं ।


साहित्य में स्थान- शुक्ल जी को हिंदी साहित्य के श्रेष्ठ आलोचक, निबंधकार, इतिहासकार एवं साहित्यकार के रूप में याद किया जाता है । इनकी विलक्षण प्रतिभा के कारण ही उनके समकालीन हिंदी गद्य के काल को शुक्ल युग के नाम से संबोधित किया जाता है ।



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