jivani aur atmakatha mein antar

jivani aur atmakatha mein antar

jivani aur atmakatha  mein antar

दोस्तों इस लेख में हम आपको जीवनी और आत्मकथा के बारे में बताने जा रहे हैं।
jivani aur atmakatha  mein antar

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jivani(जीवनी)

जीवनी हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा है। जीवनी  में किसी विशिष्ट व्यक्ति या महापुरुष के जन्म से लेकर मृत्यु तक की महत्वपूर्ण घटनाओं का चित्रण किया जाता है। जीवनी में लेखक पूरी तरह तटस्थ रहता है।इसमें प्रमाणिकता की आवश्यकता होती है

(1)रामविलास शर्मा-निराला की साहित्य साधना।

(2)अमृत राय-कमल का सिपाही।


jivani aur atmakatha  mein antar


नई कविता की विशेषताएं लिखिए

atmakatha (आत्मकथा)

आत्मकथा का शाब्दिक अर्थ है अपनी कथा।आत्मकथा किसी विशिष्ट व्यक्ति के द्वारा लिखा गया ऐसा आख्यान है जिसमें लेखक अपनी जीवन की कथा स्मृतियों के आधार पर लिखता है। इस विधा में लेखक के कई अज्ञात और गोपनीय पहलू प्रगट होते हैं।

(1) गुलाब राय मेरी -असफलताएं
(2) महात्मा गांधी- सत्य के प्रयोग
(3) हरिवंश राय बच्चन- क्या भूलूं क्या याद करूं।

जीवनी और आत्मकथा में अंतर 4

jivani(जीवनी


1-जीवनी में किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन का वर्णन रहता है।

2-जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित होती है।

3-जीवनी में लेखक तटस्थ रहता है।

4-जीवनी में प्रमाणिकता की आवश्यकता होती है।

प्रमुख कवि -

(1)रामविलास शर्मा-निराला की साहित्य साधना।

(2)अमृत राय-कमल का सिपाही।

अब हम आपको बताएंगे जीवनी और आत्मकथा में किस प्रकार से आप अंतर लिख सकते हैं। jivani aur atmakatha  mein antar लिखना सीखिए बिल्कुल आसान तरीके से।

atmakatha (आत्मकथा)


1-आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन की घटनाओं का वर्णन करता है।

2-आत्मकथा काल्पनिक भी हो सकती है।

3-आत्मकथा में लेखक तटस्थ नहीं रहता।

4-आत्मकथा में प्रमाणिकता की कोई आवश्यकता नहीं होती।

प्रमुख कवि -

(1) गुलाब राय मेरी -असफलताएं
(2) महात्मा गांधी- सत्य के प्रयोग
(3) हरिवंश राय बच्चन- क्या भूलूं क्या याद करूं।

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